उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर सियासी पारा
चढ़ने लगा है। गांव की सरकार यानी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम प्रधान, बीडीसी, और जिला पंचायत सदस्य) को लेकर हर तरफ चर्चाएं तेज हैं।
उत्तर प्रदेश में पिछला पंचायत चुनाव साल 2021 में हुआ था, जिसके बाद मई 2026 में मौजूदा ग्राम प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल है — आखिर यूपी पंचायत चुनाव 2026-27 कब होंगे?
चुनाव में देरी की सबसे बड़ी वजह: OBC आरक्षण
यूपी पंचायत चुनाव टलने की मुख्य वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण के निर्धारण की प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले के तहत आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। आयोग पूरे प्रदेश में पिछड़े वर्ग का डेटा और सामाजिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन कर रहा है। इसी सर्वे रिपोर्ट में लग रहे समय के कारण आधिकारिक तारीखों का ऐलान रुका हुआ है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख
चुनाव में देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 243ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल निश्चित होता है और इसे अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ाया जा सकता।
आज, 14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में इस मामले की अहम सुनवाई हो रही है, जिसमें राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी प्रगति और चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा का ब्योरा देना है। इस सुनवाई के बाद ही तारीखों को लेकर अंतिम तस्वीर साफ होगी।
क्या नवंबर 2026 तक चुनाव कराना कानूनी मजबूरी है?
यूपी पंचायती राज अधिनियम के नियमों के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल समाप्त होने के अधिकतम 6 महीने के भीतर चुनाव कराने का प्रावधान है। मई में कार्यकाल खत्म होने के बाद यह 6 महीने की अवधि नवंबर 2026 में समाप्त हो रही है।
हालांकि कुछ राजनैतिक जानकारों का मानना है कि अगर आरक्षण प्रक्रिया में अधिक समय लगा, तो यह चुनाव 2027 की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ या उसके ठीक बाद भी खिसक सकते हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां पूरी तारीखों का ऐलान भले न हुआ हो, प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं:
अद्यतन मतदाता सूची: निर्वाचन आयोग ने जून 2026 में ही अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी थी, जिसमें लगभग 12.58 करोड़ वोटर शामिल हैं। इस बार बड़े पैमाने पर डुप्लीकेट नाम हटाए गए हैं।
हाईटेक तकनीक: फर्जी मतदान रोकने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
निष्कर्ष
अगर आप भी गांव के चुनाव में दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतिम आदेश और निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें। सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी फर्जी तारीख पर भरोसा न करें
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