चंदौली न्यूज़ | 30 अक्टूबर 2026:** चक्रवाती तूफान 'अर्नब' और लगातार हो रही बेमौसम बारिश के कारण चंदौली जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। एक तरफ जहां कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है, वहीं हजारों एकड़ में लगी धान की फसल खेतों में बिछ गई है।
जिले के इलिया, शहाबगंज, चकिया, सकलडीहा, मुगलसराय और नियामताबाद क्षेत्रों में लगातार बारिश से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता अब दो है -
1. बिजली कब आएगी और
2. फसल का मुआवजा कैसे मिलेगा। दोनों सवालों के जवाब नीचे हैं।
⚡ विद्युत विभाग की टीमें बारिश के बीच बहाली में जुटीं
लगातार बारिश और तेज हवा से कई जगहों पर बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त हो गए हैं। विद्युत विभाग की टीमें बारिश के बीच ही बहाली के काम में जुटी हुई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहले अस्पताल, पेयजल और मुख्य बाजारों की बिजली बहाल की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीमों को लगाया गया है। अगर आपके क्षेत्र में अभी भी बिजली नहीं है तो अपने स्थानीय बिजली घर या 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं।
🌾 क्या आप फसलों के नुकसान के लिए सरकारी मुआवजा पाना चाहते हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेमौसम बारिश और तूफान से हुए फसल नुकसान पर सब्सिडी (फसल मुआवजा) दी जाती है। चंदौली जिले के किसानों के लिए इसकी पूरी प्रक्रिया नीचे दी गई है।
📋 पात्रता और शर्तें (Eligibility)
1. नुकसान की सीमा
आपकी फसल का नुकसान कम से कम 33% या उससे अधिक होना चाहिए।
2. बटाईदारों के लिए बड़ी राहत: राज्य सरकार की नई नीति के अनुसार, अब भूमिहीन या बटाई पर खेती करने वाले किसान भी इस मुआवजे के हकदार हैं। यह चंदौली के हजारों किसानों के लिए बड़ी राहत है।
3. मुआवजा राशि: सिंचित क्षेत्र (नहर/ट्यूबवेल वाले खेत) के लिए करीब ₹13,500 प्रति हेक्टेयर वर्षासिंचित (बारिश पर निर्भर) क्षेत्र के लिए ₹6,800 प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा बैंक खाते में भेजा जाता है।
🗺️ मुआवजा पाने की चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step)
1. लेखपाल/राजस्व टीम द्वारा मौके पर सर्वे (Girdawari) आपदा के तुरंत बाद जिला प्रशासन (DM) के निर्देश पर लेखपाल, कानूनगो और कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक (TA) गांवों का दौरा करते हैं। यह टीम आपके खेत में जाकर नुकसान का आकलन करेगी और एक 'पंचनामा' (सर्वे रिपोर्ट) तैयार करेगी।
किसान क्या करें: लेखपाल के गांव आने पर अपने खेत का सर्वे जरूर करवाएं और उनके पास अपने खतौनी/बटाईदार विवरण दर्ज कराएं। खेत की फोटो-वीडियो सबूत के तौर पर रख लें।
2. तहसील स्तर पर सत्यापन और राहत आयुक्त पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग**
लेखपाल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को तहसील स्तर (जैसे चकिया, सकलडीहा, मुगलसराय) पर सत्यापित किया जाता है। इसके बाद पात्र किसानों का पूरा विवरण (नाम, आधार, बैंक खाता, गाटा संख्या और नुकसान का प्रतिशत) उत्तर प्रदेश सरकार के राहत आयुक्त पोर्टल (Relief Commissioner Portal) पर फीड किया जाता है।
3. सीधे बैंक खाते में भुगतान (DBT) डेटा अपलोड होने और शासन से बजट जारी होने के बाद मुआवजा राशि सीधे किसान के आधार लिंक बैंक खाते (Direct Benefit Transfer) में ट्रांसफर कर दी जाती है। इसलिए बैंक खाता आधार से लिंक होना बहुत जरूरी है।
📄 आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)
अपने पास इन दस्तावेजों को तैयार रखें, ताकि लेखपाल या कृषि विभाग द्वारा मांगे जाने पर आप तुरंत दे सकें:
📄 खतौनी (भूमि का रिकॉर्ड): खेत के गाटा संख्या की पहचान के लिए
🆔 आधार कार्ड: पहचान और सत्यापन के लिए।
🏦 बैंक पासबुक की फोटोकॉपी:ध्यान रहे कि आपका खाता आधार से लिंक (Aadhaar Seeded) होना चाहिए।
📝 बटाईदार प्रमाण (यदि लागू हो): यदि आप बटाई पर खेती करते हैं, तो ग्राम प्रधान या भूस्वामी का सहमति पत्र/घोषणा पत्र।
📞 शिकायत और सहायता (Helpline)
यदि आपके गांव में सर्वे टीम नहीं आई है या आपका नाम छूट गया है, तो आप तुरंत यहां संपर्क कर सकते हैं:
तहसील कार्यालय: अपने क्षेत्र के एसडीएम (SDM) या तहसीलदार कार्यालय में जाकर लिखित सूचना दें।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर:आप 1076 पर कॉल करके भी अपनी फसल नुकसान की शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं।
निष्कर्ष:
किसान भाई अफवाहों पर ध्यान न दें। अपने खेत का सर्वे जरूर कराएं और दस्तावेज तैयार रखें। चंदौली दर्पण हर अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाएगा। ऐसी ही चंदौली
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