चंदौली के चकिया स्थित फिरोजपुर गांव में सड़क पर रेंगते दिखे 8 फीट लंबे मगरमच्छ का वीडियो वायरल। जानिए कैसे वन विभाग ने आधी रात को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर ग्रामीणों को खौफ से निजात दिलाई।
चकिया (चंदौली)। उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले का चकिया क्षेत्र इन दिनों एक खौफनाक और हैरान करने वाली घटना के चलते पूरे प्रदेश में सुखियों में है। चंदौली के चकिया वन क्षेत्र से सटे फिरोजपुर गांव की मुख्य पक्की सड़क पर बीती रात एक 8 फीट लंबा विशालकाय मगरमच्छ रेंगता हुआ दिखाई दिया। रात के सन्नाटे में बीच सड़क पर मगरमच्छ के इस लाइव मूवमेंट का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, यह देखते ही देखते आग की तरह वायरल हो गया।
अगर आप भी वन्यजीवों के रेस्क्यू और ग्रामीण इलाकों के इस रोमांच से रूबरू होना चाहते हैं, तो पढ़िए इस घटना की पूरी इनसाइड स्टोरी।
सड़क पर 'खौफ का लाइव शो'
रोज़ की तरह फिरोजपुर गांव के लोग अपनी शाम ढलने के बाद घरों की तरफ लौट रहे थे। तभी अचानक कुछ राहगीरों की नज़र सड़क पर पड़ी। टॉर्च की रोशनी चमकी, तो सबके होश उड़ गए। पानी में रहने वाला एक भारी-भरकम मगरमच्छ बेखौफ होकर सड़क पार कर रहा था। उसे देखकर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और दहशत फैल गई। कुछ साहसी युवकों ने दूर से ही इस पूरे नजारे का लाइव वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जिसमें मगरमच्छ की डरावनी चाल को साफ देखा जा सकता है।
2 साल पुराना आतंक और गहरे पानी का रहस्य
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मगरमच्छ कोई नया मेहमान नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से यह विशालकाय जीव गांव के स्थानीय पोखरे (तालाब) और आस-पास के जलभराव वाले इलाकों में देखा जा रहा है।
खेतों में काम करने जाने वाले किसानों और मवेशी चराने वालों के लिए यह एक बड़ा खतरा बना हुआ था। ग्रामीण लंबे समय से इसे पकड़ने की मांग कर रहे थे, लेकिन जब भी यह बाहर आता, शोर सुनकर दोबारा गहरे पानी में लापता हो जाता था।
वन विभाग का आधी रात को रेस्क्यू ऑपरेशन
सड़क पर मगरमच्छ के लाइव मूवमेंट की सूचना जैसे ही वन विभाग को मिली, महकमे में खलबली मच गई। चकिया के वन रेंजर अश्वनी चौबे ने तुरंत एक्शन लेते हुए रेस्क्यू टीम को पिंजरे और मजबूत जालों के साथ फिरोजपुर गांव के लिए रवाना किया।
आधी रात को टॉर्च की रोशनी में वन कर्मियों और ग्रामीणों की संयुक्त टीम ने एक बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन शुरू किया। मगरमच्छ काफी आक्रामक हो रहा था, लेकिन सूझबूझ दिखाते हुए टीम ने काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया (रेस्क्यू कर लिया)। वन विभाग के अनुसार, पकड़े गए मगरमच्छ को इंसानी आबादी से मीलों दूर चंद्रप्रभा वन्यजीव अभ्यारण्य के एक सुरक्षित और बड़े जलस्रोत में छोड़ दिया गया है, जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
मानसून के बाद क्यों बाहर आ रहे हैं मगरमच्छ?
वन विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की विदाई के बाद जैसे-जैसे स्थानीय तालाबों और गढ़ों का जलस्तर कम होने लगता है, मगरमच्छ भोजन और नए आश्रय की तलाश में रिहायशी इलाकों की तरफ रुख करने लगते हैं। वन विभाग ने चकिया क्षेत्र के तालाबों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और छोटे बच्चों व पालतू पशुओं को पानी के स्रोतों से दूर रखने की सलाह दी है।
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