उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर विकास को गति देने के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक चंद्रप्रभा वन्यजीव
अभयारण्य (Chandraprabha Wildlife Sanctuary) और यहाँ के प्रसिद्ध राजदरी-देवदरी जलप्रपात (Waterfalls) को ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के रूप में और अधिक विकसित किया जा रहा है। इस विकास का उद्देश्य न केवल देश-विदेश के सैलानियों को प्राकृतिक सुंदरता से रूबरू कराना है, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है।
क्या-क्या मिलेंगी नई सुविधाएं और विकास कार्य?
वन विभाग और ईको-टूरिज्म बोर्ड द्वारा इस पूरे क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि यहाँ आने वाले पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े:
बेहतर मार्ग और साइनेज: अभयारण्य के भीतर आने-जाने वाले रास्तों को दुरुस्त करने के साथ-साथ पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए साइनबोर्ड लगाए जा रहे हैं।
विश्राम और सुरक्षा की व्यवस्था: पर्यटकों के ठहरने के लिए जंगलों के बीच बने विश्राम गृहों (Forest Rest Houses) जैसे राजदरी वन विश्राम गृह, दिलकुशा और लतीफ शाह विश्राम गृह की व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है।
ट्रेकिंग और व्यू पॉइंट्स: प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए सुरक्षित ट्रेकिंग पाथ और झरनों के पास सेल्फी व व्यूइंग पॉइंट्स को विकसित किया गया है ताकि लोग सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकें।
इस ई-टूरिज्म प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा चंदौली के स्थानीय युवाओं और ग्रामीण इलाकों को मिल रहा है:
गाइड और स्वरोजगार: क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी रखने वाले स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्हें सीधी आमदनी हो रही है।
होमस्टे और खानपान की मांग: पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर छोटे होमस्टे, पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें और हस्तशिल्प के कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
कैसे पहुंचे चंद्रप्रभा और राजदरी-देवदरी? (यात्रा की पूरी जानकारी)
1 यदि आप परिवार या दोस्तों के साथ यहाँ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इन रास्तों से आसानी से पहुँच सकते हैं:
सड़क मार्ग द्वारा: यह चंदौली जिले के चकिया तहसील से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वाराणसी, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
2 रेल मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) (लगभग 50 किमी) और वाराणसी जंक्शन (लगभग 65-67 किमी) हैं। स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
3 वायु मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) है, जो यहाँ से लगभग 65 किलोमीटर दूर है।
राजदरी और देवदरी झरनों का असली सौंदर्य जुलाई से फरवरी (विशेषकर मानसून और सर्दियों के मौसम) के दौरान देखने को मिलता है। इस दौरान यहाँ का पूरा वातावरण हरा-भरा और बेहद मनमोहक होता है।
'चंदौली दर्पण न्यूज़' की अपने पाठकों से अपील है कि जब भी आप इस प्राकृतिक खजाने की सैर पर जाएं, तो साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और प्लास्टिक कचरा फैलाकर प्रकृति को नुकसान न पहुँचाएं।
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