चलो दिल्ली - लोकतंत्र बचाओ' मार्च: जंतर-मंतर से सुप्रीम कोर्ट तक गूंजी 'वोट चोरी' की आवाज, आज होगी सुनवाई!
चंदौली दर्पण (न्यूज़ डेस्क): देश की राजधानी दिल्ली में आज राजनीतिक हलचल अपने चरम पर रही। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों (Special Intensive Revision - SIR विवाद) को लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने एक विशाल पैदल मार्च निकाला। 'चलो दिल्ली - लोकतंत्र बचाओ' नारे के साथ निकले इस मार्च ने सड़क से लेकर अदालत तक का रुख किया।
1. सड़क पर राहुल-प्रियंका का काफिला और सुप्रीम कोर्ट की चौखट
दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा।
- ट्रक पर सवार हुए दिग्गज नेता: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्ष के तमाम शीर्ष नेता एक खुले ट्रक पर सवार होकर जनता और कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे थे।
- बैरिकेड्स लगाकर रोका रास्ता: हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भगवान दास मार्ग के पास कड़े बैरिकेड्स लगाकर इस काफिले को रोक दिया।
- सीधे रजिस्ट्री में पहुंचे राहुल: काफिला रोके जाने के बाद, विशेष अनुमति लेकर राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अपनी लीगल टीम के साथ सीधे सुप्रीम कोर्ट परिसर के अंदर पहुंचे। उन्होंने रजिस्ट्री काउंटर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने और मतदाता सूचियों में कथित 'वोट चोरी' की न्यायिक जांच कराने के लिए औपचारिक याचिका दाखिल की।
- कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका को तुरंत प्रोसेस किया। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच आज (मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026) को सुनवाई करेगी।
2. प्रेस कॉन्फ्रेंस: "आखिर दिल्ली को जेल क्यों बनाया गया?"
मार्च की शुरुआत से पहले नई दिल्ली में आयोजित एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन पर जमकर निशाना साधा:
- दिल्ली की किलेबंदी पर सवाल: राहुल गांधी ने कहा, "सवाल यह है कि आखिर दिल्ली को जेल क्यों बना दिया गया है और आम लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से क्यों रोका जा रहा है? देश की राजधानी को एक किले में तब्दील कर दिया गया है।"
- जन-आंदोलन का संदेश: उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों का धन्यवाद किया और स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई है।
3. शिव जी की बारात जैसा है हमारा प्रदर्शन
प्रदर्शन के अनोखे स्वरूप को समझाते हुए राहुल गांधी ने एक बेहद दिलचस्प बयान दिया:
- भेदभाव रहित प्रदर्शन: उन्होंने इस जन-आंदोलन की तुलना 'शिव जी की बारात' से की, जिसमें हर वर्ग, जाति, धर्म और लिंग का नागरिक बिना किसी भेदभाव के शामिल हो सकता है।
- प्रशासनिक सख्ती की निंदा: उन्होंने पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने और प्रदर्शनकारियों पर की गई कड़ाई की भी कड़े शब्दों में निंदा की।
निष्कर्ष: मंगलवार की सुनवाई पर देश की निगाहें
मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनाव आयोग पर विपक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब यह लड़ाई सड़क से देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुँच चुकी है। कल मंगलवार (13 अक्टूबर) को जस्टिस सूर्यकांत की पीठ में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है।
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