प्रेम विवाह के बाद पारिवारिक कलह: बेटी का सामाजिक बहिष्कार, पिता का विवादित फैसला


दौली दर्पण न्यूज़ | उत्तर प्रदेश

​चंदौली: समाज में आधुनिकीकरण और स्वतंत्रता के नाम पर क्या-क्या हो रहा है, यह देखकर अक्सर इंसान सोच में पड़ जाता है। प्यार, बगावत और फिर परिवार के सम्मान का ऐसा दर्दनाक अंत कि सुनने वालों की रूह कांप जाए! उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले का जगदीशराय (जगदीश सराय) गांव इस समय पूरे प्रदेश में चर्चा और बहसों का केंद्र बना हुआ है।

​मामला एक ऐसी बेटी का है जिसने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया, और बदले में बाप ने अपनी ही जीती-जागती बेटी का पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर डाला!

​क्या है पूरा मामला? (दो-तीन महीने पहले की बगावत)

​गांव के किसान प्रकाश सिंह की 20 वर्षीय बेटी नेहा सिंह (जो स्नातक की पढ़ाई कर चुकी है) ने करीब दो-तीन महीने पहले अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर गांव के ही सावन पासवान से कोर्ट मैरिज (अंतरजातीय प्रेम विवाह) कर ली। सावन के पिता पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं।

​परिवार वालों ने नेहा को समझाने, वापस बुलाने और रिश्ते को संभालने की बहुत कोशिशें कीं। लेकिन प्यार के बुखार में अंधी हो चुकी बेटी अपने फैसले पर अडिग रही और अपने पति के साथ सोनभद्र जाकर रहने लगी।

​पितृ विसर्जन के दिन पीपल के नीचे हुआ 'जीती-जागती बेटी' का पिंडदान!

​जब समझाने-बुझाने के सारे रास्ते बंद हो गए, तो पिता का गुस्सा और आघात चरम सीमा पर पहुंच गया। शनिवार को पितृ विसर्जन के पावन अवसर पर, नाराज पिता प्रकाश सिंह ने घर से थोड़ी दूर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पंडितों के साथ विधि-विधान से अपनी ही जिंदा बेटी का पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर दिया।


​पिता और उनके भाई (चाचा) पप्पू सिंह का साफ कहना है:

​"बेटी ने दूसरी जाति में शादी करके हमारे परिवार की प्रतिष्ठा, इज्जत और भावनाओं को सरेआम नीलाम कर दिया। जो औलाद माता-पिता के मान-सम्मान को पैरों तले रौंद दे, वह हमारे लिए जीते जी मर चुकी है। अब हमारा उससे जीवन में कोई नाता नहीं है।"

​सोशल मीडिया पर एक्टिव, लेकिन बाप के दर्द पर साधी चुप्पी!

​जब मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए नेहा सिंह से इस अजीबो-गरीब घटना पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उसने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। नेहा ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर मैसेज भेजकर इस मुद्दे पर कोई भी बात करने या चर्चा करने से साफ इनकार कर दिया। खबर है कि वह इस समय सोनभद्र में अपने पति के साथ सुरक्षित रह रही है।

​संपादक की कलम से: कड़वा सच और जलते सवाल!

​आज के इस तथाकथित आधुनिक समाज में माता-पिता के खिलाफ जाकर इस तरह कदम उठाना धीरे-धीरे आम बात बनती जा रही है।

​जिस बाप ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिस मां ने अपनी रातों की नींद हराम करके पाला-पोसा... क्या 20 साल का दुलार और परवरिश 2 महीने के प्यार के आगे इतनी सस्ती हो जाती है?

​क्या आज की युवा पीढ़ी इतनी आत्म केंद्रित (Selfish) हो चुकी है कि उसे परिवार की इज्जत और संस्कारों की कोई परवाह ही नहीं रही?

​और दूसरी तरफ... क्या किसी इंसान के जीते-जी उसका पिंडदान कर देना ही आखरी रास्ता बचता है?

​यह समाज किस दिशा में जा रहा है और किस तरह का माहौल चाहता है, यह समझ से पूरी तरह परे लगता है! इस घटना ने एक बार फिर से परिवार, संस्कार, कानून और व्यक्तिगत आजादी के बीच की खाई को गहरा कर दिया है।

​आपकी क्या राय है?

क्या बेटी का यह कदम सही था या पिता का यह गुस्सा जायज है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर दें और इस खबर को शेयर करें!

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